पाकिस्तानी सेना के बंधक बनाए सभी 214 सैनिकों को मौत के घाट उतारा

  
Last Updated:  March 15, 2025 " 04:14 pm"

बलूच लिबरेशन आर्मी के प्रवक्ता ने किया दावा।

पेशावर : पाकिस्तान में क्वेटा से पेशावर जा रही जाफर एक्सप्रेस को हाइजैक करने वाले बलूच विद्रोहियों ने बड़ा दावा किया है। उनका कहना है कि पाकिस्तानी सेना के बंधक बनाए गए सभी 214 जवानों को उन्होंने मौत के घाट उतार दिया है। इससे पहले पाकिस्तानी सेन विद्रोहियों का कहना है कि उन्होंने पाकिस्तानी सेना को युद्ध बंदियों की अदला-बदली के लिए 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया था. विद्रोहियों ने पाक सेना और देश की सरकार पर ढिठाई करने का आरोप लगाया. विद्रोहियों का कहना है कि हमेशा की तरह सेना और सरकार की वजह से सैनिकों की जान गई है. अहंकार दिखाया और वो अपनी जिद पर अड़े रहे.
बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी ने कहा कि अल्टीमेटम देने के बाद भी सेना और सरकार ने कोई बातचीत नहीं की और जमीनी हकीकत जानते हुए भी अपनी आंखें बंद कर ली. उन्होंने कहा कि सेना और पाक सरकार की इसी जिद के चलते सभी 214 बंधकों को मार दिया गया है. इसके जिम्मेदार वो लोग खुद हैं. विद्रोहियों ने कहा कि BLA ने हमेशा युद्ध के सिद्धांतों और अंतरराष्ट्रीय कानून के मुताबिक काम किया है, लेकिन पाकिस्तानी सरकार ने अपने सेनिकों की जान बचाने की बजाय उन्हें युद्ध की भेंट चढ़ाना सही समझा▪️
[15/03, 14:04] Rajendra Kopargaonkar: बोलन: सभी 214 बंधक सैन्य कर्मियों को मार दिया गया, युद्ध अब भी जारी – बीएलए

बोलन (प्रेस विज्ञप्ति):
बोलच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) के प्रवक्ता जेयंद बलोच ने एक बयान जारी कर कहा कि पाकिस्तानी सेना को युद्धबंदी कैदियों की अदला-बदली के लिए 48 घंटे की मोहलत दी गई थी, जो उनके सैनिकों की जान बचाने का अंतिम मौका था। लेकिन पाकिस्तान ने अपनी हठधर्मिता और सैन्य अहंकार दिखाते हुए न केवल गंभीर बातचीत से इनकार किया, बल्कि जमीनी हकीकत से भी आंखें मूंद लीं। उसकी इसी हठधर्मिता के चलते सभी 214 बंधक सैन्य कर्मियों को मौत के घाट उतार दिया गया।

प्रवक्ता ने कहा कि बीएलए हमेशा युद्ध के नियमों और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन करता आया है, लेकिन पाकिस्तानी सरकार ने अपने सैनिकों को बचाने के बजाय उन्हें युद्ध में कुर्बान कर दिया। इस हठधर्मिता की कीमत उसे अपने सैनिकों की मौत के रूप में चुकानी पड़ी।

बीएलए के 12 लड़ाके शहीद, फिदायीनों ने दुश्मन को करारा जवाब दिया।

बीएलए ने इस अभियान में अपने 12 बलोच लड़ाकों (सरमचारों) के मारे जाने की पुष्टि की, जिन्होंने पाकिस्तानी सेना के खिलाफ ऐतिहासिक बलिदान दिया।

बीएलए प्रवक्ता के अनुसार, “ऑपरेशन दर्रा बोलान” में फिदायीनों ने पाकिस्तानी सैनिकों को एक रणनीतिक जाल में फंसा लिया। कुछ बंधकों को खास बोगियों में बंद किया गया, जिससे पाकिस्तानी सैनिकों को फंसाया गया। बाकी बंधकों को सुरक्षित ठिकानों तक ले जाया गया। जब पाकिस्तानी एसएसजी कमांडोज़ की “जरार कंपनी” बंधकों को छुड़ाने पहुँची, तो फिदायीनों ने जबरदस्त हमला कर उन्हें भारी नुकसान पहुँचाया।
•घंटों चले इस संघर्ष में कई एसएसजी कमांडो मारे गए और सभी बंधकों को मार दिया गया।
फिदायीनों ने अंतिम गोली तक ये लड़ाई लड़ी और अंत में खुद को उड़ा दिया।

पाकिस्तानी सेना झूठे दावे कर रही है।

बीएलए के प्रवक्ता ने कहा कि अब पाकिस्तानी सेना उन फिदायीनों की लाशों को अपनी “जीत” बताने की नाकाम कोशिश कर रही है। सेना, अपनी तमाम सैन्य और खुफिया शक्ति के बावजूद, बंधकों को बचाने में विफल रही। जिन लोगों को पाकिस्तानी सेना “बचाए गए सैनिक” कह रही है, उन सभी को पहले ही बीएलए ने युद्ध के नियमों के तहत सुरक्षित रिहा कर दिया था।

युद्ध अभी खत्म नहीं हुआ – बीएलए।

बीएलए प्रवक्ता ने कहा कि यह लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई बल्कि और तेज़ हो गई है। बीएलए के लड़ाके अलग-अलग इलाकों में पाकिस्तानी सेना पर हमले कर रहे हैं। पाकिस्तानी सेना अभी तक अपने मारे गए सैनिकों की लाशें उठाने में भी असमर्थ है। हर बीतते पल के साथ बीएलए की बढ़त और स्पष्ट हो रही है।

प्रवक्ता ने कहा कि बीएलए “ऑपरेशन दर्रा बोलान” की पूरी जानकारी मीडिया को तभी जारी करेगा जब अभियान पूरी तरह समाप्त हो जाएगा। फिलहाल, युद्ध जारी है।

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